Our Blogs

जब बीमारी से बड़ी हो गई इलाज की लड़ाई

Posted on: 22 JUN 2026  

|   By: तूबा खान

सिकल सेल डिजीज से जूझ रहे बच्चों की चुनौतियां केवल बीमारी तक सीमित नहीं होतीं। कई बार इलाज की राह में आने वाली मुश्किलें भी उतनी ही कठिन साबित होती हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर की रहने वाली आशा (बदला हुआ नाम) की कहानी इसी सच्चाई को सामने लाती है।

आशा महज छह महीने की थी, जब उसके पैरों के पंजों में सूजन आने लगी। परिवार उसे डॉक्टर के पास लेकर गया। जांच के बाद पता चला कि उसे सिकल सेल डिजीज है। उस दिन से परिवार की जिंदगी बदल गई।

सिकल सेल डिजीज एक ऐसी आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है, जिसमें मरीजों को बार-बार दर्द, कमजोरी, संक्रमण और कई बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है। आशा के साथ भी यही हुआ। उसका बचपन अस्पतालों, जांचों और उपचार के बीच बीता।

समय के साथ परिवार उसे बेहतर इलाज की तलाश में कई अस्पतालों में लेकर गया। नियमित रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) उसकी जिंदगी का हिस्सा बन गया। एक समय ऐसा था जब उसे हर एक महीने में रक्त चढ़ाना पड़ता था। आज यह अंतराल लगभग दो महीने का हो गया है, लेकिन अस्पतालों के चक्कर अब भी उसकी दिनचर्या का हिस्सा हैं।

आशा आज 9वीं कक्षा में पढ़ती है। वह पढ़ना चाहती है, अपने दोस्तों के साथ स्कूल जाना चाहती है और अपने सपनों को पूरा करना चाहती है। लेकिन बीमारी के कारण उसे अक्सर 8 से 10 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। कई बार उसकी पढ़ाई छूट जाती है और उसे दोबारा सब कुछ पकड़ने की कोशिश करनी पड़ती है।

परिवार को जब बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के बारे में जानकारी मिली, तो उन्हें लगा कि शायद अब उनकी बेटी को इस बीमारी से स्थायी राहत मिल सकेगी। लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी में एक और बड़ा झटका आया।

एक रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) के बाद हुई जांच में पता चला कि आशा एचआईवी (HIV) से संक्रमित हो गई है। यह खबर पूरे परिवार के लिए बेहद दर्दनाक थी। सिकल सेल डिजीज से वर्षों से लड़ रहे परिवार के सामने अब एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी थी।

एचआईवी संक्रमण की पुष्टि होने के बाद विस्तृत जांच की गई और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) शुरू की गई। एचआईवी के उपचार में वायरल लोड की नियमित निगरानी की जाती है और उसी के आधार पर दवाओं और उपचार की योजना तय की जाती है। परिवार ने इस नई चुनौती का भी उसी साहस के साथ सामना किया, जिसके साथ वे वर्षों से सिकल सेल डिजीज से लड़ रहे थे।

आज आशा दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉ. गौरव खार्या और उनकी टीम की देखरेख में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया के लिए उसे और उसके परिवार को कई जांचों, परीक्षणों और कठिन चरणों से गुजरना पड़ा है। हर टेस्ट के साथ एक नई चिंता जुड़ी होती है, लेकिन हर कदम उन्हें एक नई उम्मीद के भी करीब ले जाता है।

आशा की सबसे बड़ी इच्छा केवल खुद स्वस्थ होना नहीं है; वह चाहती है कि जिस संघर्ष से उसे गुजरना पड़ा, वैसा किसी और बच्चे को न झेलना पड़े।

उसका कहना है कि सिकल सेल डिजीज से पीड़ित बच्चे केवल बीमारी से नहीं लड़ते। वे इलाज से जुड़ी चुनौतियों, बार-बार अस्पताल में भर्ती होने, safe रक्त की उपलब्धता, आर्थिक बोझ, पढ़ाई में रुकावट और मानसिक तनाव से भी लड़ते हैं। कई परिवारों के लिए यह लड़ाई वर्षों तक चलती रहती है।

आशा अकेली नहीं है। देशभर में हजारों बच्चे सिकल सेल डिजीज के साथ जीवन जी रहे हैं। उनमें से कई उपचार से जुड़ी जटिलताओं और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की समस्याओं का सामना करते हैं। यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कहां सुधार की जरूरत है और कैसे हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर बच्चे को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और समय पर इलाज मिले।

आज जब आशा अपने बोन मैरो ट्रांसप्लांट की ओर बढ़ रही है, तो उसके साथ एक उम्मीद भी आगे बढ़ रही है—एक ऐसे भविष्य की उम्मीद, जहां सिकल सेल से पीड़ित बच्चों को केवल बीमारी से लड़ना पड़े, इलाज की कमियों से नहीं।

हम आशा करते हैं कि आशा का ट्रांसप्लांट सफल हो, वह एक स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सके, और साथ ही यह भी कि हर मरीज को सुरक्षित एवं पूरी तरह जांचा-परखा रक्त उपलब्ध हो, ताकि किसी अन्य बच्चे और उसके परिवार को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

क्योंकि हर बच्चे का अधिकार केवल इलाज नहीं, बल्कि सुरक्षित इलाज है।

व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।

Share on:

We are dedicated to your child's well-being, offering top-tier medical care with expertise, empathy, and a focus on healing. Our specialties include pediatric oncology, hematology, immunology, and bone marrow transplant.

Our Location

Indraprastha Apollo Hospital, New Delhi -110076

Useful Links

    Working Hours

      © 2024 Designed and Developed by Medipage Communications. All Rights Reserved